सोई हुई है अज्ञान में
दास्तां इंसान की
बोई हुई है इस में हमने
नस्लें झूठे शान की
क्षण क्षण मिटे पल पल बीते
देख बुराई कोई न चेते
इतनी कटूता इतनी छलता
इस जमीन पर रहते
मिट्टी ही ना बंजर निकले
भारत वर्ष के रहते
सत्यमेव जयते
दास्तां इंसान की
बोई हुई है इस में हमने
नस्लें झूठे शान की
क्षण क्षण मिटे पल पल बीते
देख बुराई कोई न चेते
इतनी कटूता इतनी छलता
इस जमीन पर रहते
मिट्टी ही ना बंजर निकले
भारत वर्ष के रहते
सत्यमेव जयते