जब दागा सब होता है;
तब जागा सब होता है
बीती बातों का मौसम;
तब भागा सब होता है
पल नहीं होते जरा भी;
लुट गये हम; शराबी !
होते होते होता है;
आँसु भी जब रोता है
एक फसाना जीत गया और
एक फसाना खोता है
जब ज्यादा सब होता है;
तब सादा सब होता है
बीती रातों का मौसम;
जब नादान सब होता है
कल नहीं होते जरा भी;
लुट गये हम; शराबी !
तब जागा सब होता है
बीती बातों का मौसम;
तब भागा सब होता है
पल नहीं होते जरा भी;
लुट गये हम; शराबी !
होते होते होता है;
आँसु भी जब रोता है
एक फसाना जीत गया और
एक फसाना खोता है
जब ज्यादा सब होता है;
तब सादा सब होता है
बीती रातों का मौसम;
जब नादान सब होता है
कल नहीं होते जरा भी;
लुट गये हम; शराबी !