वो दिन आज भी गुलाल है

वो दिन आज भी गुलाल है
खयालों का असर बहाऱ है..!

"पतझड में अमन बनके आती रहीं
मेरे दिल में नम़ी बन समाते रहीं
बारीश का तु झरना, फुलों की लड़ी
तेरी उल्फत में मैने ये रचना गढ़ी
उठाओ दिल तो गम अपार है
मिलनसार जिंदगी ही यादगार है
हरेक पल तो खुशनिसार है
यही लगे तु ही तो, प्यार है"